Tuesday, 20 November 2012

बातें क्या हैं? छल हैं।


बातें क्या हैं?

छल हैं।

जो मैं करती हूँ

जो तुम करते हो...

एक अरसा बीता

हम दोनों को

छल किए हुए.........

वही छल जो

हम दोनों को

एक-दूसरे के करीब

लाता था----

छल एक भ्रम था

जो नश्वरता का गुण

लिए आया था हमारे बीच

और अपने गुण के साथ

समाप्त हो गया-----

अब तो एक रेखा बन गई

है तुम्हारे और मेरे बीच

एक लक्ष्मण-रेखा!

जो अखंड सत्य है

तुम अपनी समाप्ति के

डर से, और मैं अपनी----

इस रेखा को पार

नहीं कर पा रहे हैं----

आश्चर्य!! हमारा रिश्ता

भ्रम पर टिका था,

जिसने अपनी समाप्ति के

साथ-साथ हमारे

रिश्ते को भी समाप्त कर गया।

 

7 comments:

  1. आपके इस प्रविष्टी की चर्चा बुधवार (21-11-12) के चर्चा मंच पर भी है | जरूर पधारें |
    सूचनार्थ |

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  2. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 21/11/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  3. बाते क्या हैं ? भ्रम होता नहीं पर हम भ्रम का बहाना बनाए जीते चले जाते हैं ... सुंदर प्रस्तुति

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  4. बेहतरीन...
    दिल छूने वाली...

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  5. सुन्दर...
    हृदय के कोमल भाव अच्छी तरह उकेरे हैं सोनिया...
    सस्नेह
    अनु

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  6. सच में ! ये भी एक अजीब ही छल है.......
    बहुत खूबसूरती से दर्शाया है आपने...
    ~सादर !

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