Friday, 4 May 2012

( अजन्मी भ्रूण की कहानी )

आज गीला है बहुत,
मेरी माँ का आंगन
मृत्यु   पर मेरी  रोई बहुत!!!
क्षण-क्षण हुई आहत मेरी माँ...
जाने अबल क्यों हो गई?
दुर्जन जगत के सामने,
क्यों आश्वहीन वो हो गई?
मैं; चार माह की थी.. अजन्मी
कोख को समझी जगत,
अनजान थी, ,मैं मूर्ख थी,
मुझ को कहाँ इतनी समझ...
वंचक बना मेरा पिता,
औरस की थी उसे लालसा
जीवन की मेरी नाव का
पतवार कोई ना बना.......
मेरी माँ बिलखती ही रही,
दानव पिता के सामने....
औजार,चाक़ू,पिनों से.....मेरी जब हत्या हुई
यम भी लगे थे कांपने,
मेरी माँ की कोख उजड़ गई
खिलने से पहले एक कलि
बिन खाद ,जल के मर गई
इतने बड़े संसार में मेरी माँ अकेली पड़ गई----२
देख माँ के इस एकांत को
मेरी आत्मा बिफर उठी..
और चीख कर मैंने कहा----
ओ पुरुष! तू पुरुषार्थ के
क्यों दंभ से भीगा हुआ?
क्या तू नहीं है जानता?
मेरे जनम से जो जग बना
मेरे अंत से मिट जायेगा...
कन्या-भ्रूण हत्या पाप से
तू कभी ना बच पायेगा, तू कभी ना बच पायेगा

सोनिया बहुखंडी गौर

19 comments:

  1. शक्तिशाली एवं सार्थक पोस्ट....................

    आभार .
    अनु

    ReplyDelete
  2. बहुत मर्मस्पर्शी रचना ...

    क्षण-क्षण हुई आहत मेरी माँ...
    जाने अबल क्यों हो गई?
    दुर्जन जगत के सामने,
    क्यों आश्वाहीन वो हो गई?

    अबला और आशा विहीन शब्द एक बार देख लें ...

    ReplyDelete
  3. mam abal aur ashvaheen mane speechless baaki aap batyen kya hona chahiye _ saadar

    ReplyDelete
  4. प्रभावी और संवेदनशील रचना ... सोचने कों विवश करती ...

    ReplyDelete
  5. आपकी ए रचना पुरुषों को अपराधी एवं महिलाओं को अबला साबित कर रही है ....ऐसा जान पड़ता है कि भ्रूण हत्या के पीछे केवल और केवल पुरुषों का हाथ है और औरत असहाय है कुछ करने में असमर्थ ....

    किन्तु मैं आपकी इन बातों से केवल इतना ही सहमत हूँ कि "भ्रूण हत्या अपराध है " किन्तु इसमें महिला असहाय होती है ए तो कोरी बकवास है ...अनेको ऐसे उदहारण है जिसमे केवल व केवल महिला जिम्मेदार होती है इस हत्या के लिए ...

    मेरी समझ से ए ज्यादा बेहतर होता कि आप अपराधी का लिंगभेद न करते हुए केवल अपराध कि निंदा कि होती तो शायद पोस्ट कि गुणवत्ता बढ़ जाती ...

    सादर,
    उपेन्द्र दुबे

    ReplyDelete
    Replies
    1. पूरी विनम्रता के साथ कहना चाहूँगा कि मैं उपेन्द्र जी की बात से पूरी तरह सहमत हूँ |

      Delete
  6. बेहद मार्मिक

    ReplyDelete
  7. भावों से नाजुक शब्‍द को बहुत ही सहजता से रचना में रच दिया आपने.........

    ReplyDelete
  8. भूल सुधार ---
    कल 07/05/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर पर लिंक की गयी हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    ReplyDelete
  9. par kuchh maa v hatya karti......gamvir samasya..

    ReplyDelete
  10. main uljheshabd ji se sahmat hoon , lingbhed nhi hona chahiye , isi vishay par meri kavita jarur padhiye.
    http://bebkoof.blogspot.in/2009/06/blog-post_6665.html#comment-form

    ReplyDelete
  11. ज्वलंत विषय को लेकर लिखी गई सार्थक और सुन्दर रचना |

    ReplyDelete
  12. सार्थक रचना गंभीर समस्या का समाधान तलाशती.

    बधाई.

    ReplyDelete
  13. saarthak evam behad samvedan sheel rachna

    ReplyDelete