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Saturday, 16 February 2019

पुलवामा

#पुलवामा

कल से रसोई में छौंक नहीं पड़ी
उबला खाना.... जेहन में विचारों की तरह उबल रहा है
माँ कहती है मरने वाले के लिए दो बेल खाना छोड़ना पड़ता है।

कल से बेटे ने खिलौना बंदूक उठा रखी है
पूछता है किसने बनाई ये पिस्तौल
मैंने कहाँ हमने
गोलियां किसने डाली
मन ही मन बुदबुदाई "हमने"
बेटा बोला कल से पापा शांत हैं
मेरे सर को एक बार नहीं सहलाया
मैंने कहा- कई पिताओं का शोक उनके सर पर बैठा है।

भाई कहता है मुझे लाल रंग बेहद पसंद है
पर इतना भी नहीं कि
तिरंगा रंग जाए, मेरी पसंद को जीवन का अंश बनना चाहिए
मौत का नहीं!

पड़ोस की सुखिया दादी बोली
बाबू बोला था
मरूँगा नहीं मैं माई याद रखना
बस जाते समय खुद को तुम में छोड़ जाऊंगा
खामोशियाँ मत पकाना मेरे शोक में
घर के लोगों के बीच नर्म मुस्कान बो देना
जो शहीदों की मौत पर
ईश्वर की बैठक तक गूँजे।

और मैं दो बेल का खाना
छोड़े शोक मना रही हूँ
जबकि मुझे भी ईश्वर की बैठक को
सुखिया दादी की नर्म मुस्कान से विचलित करना है
मुस्काते हुए!

सोनिया गौड़

1 comment:

  1. देशभक्ति का वास्तिवक रूप देश पर कुर्बान होने वाले समझा जाते हैं,
    भावपूर्ण रचना

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