Saturday, 14 January 2017

लेनिन...... एक औरत का किस्सा (2)

लेनिन-- (2)
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       देवताओं की रात्रि समाप्त हो चुकी है, सूरज अपने नए रूप में उत्तरायण में प्रवेश कर चुका है.... देवताओं की भोर छलनी से छन छन कर फ़ैल चुकी है। सुना है अब रातें हलकी हो जाएंगी, और दिन भारी।  मेरे लिए तो दोनों बराबर हैं क्योंकि अनिमेष का मुँह अब गुस्से में सूजने लगा है और मैंने आज ध्यान से देखा तो पार्वती का मुँह भी अब सूज रहा था, बेचारे शिव बेचारगी में अभी तलक मुस्करा रहे थे, और उनकी बेचारगी मुझे खुद की बेचारगी से बड़ी लग रही थी। चूंकि मैं जिस शहर में थी वह भीड़ से तो भरा था पर अकेलेपन की। एक मैं और आ गई इसका अकेलापन बढ़ाने के लिए। दो लोगो की बीच पसरी चुप्पी से आया ये अकेलापन, मुझे हवा की तरह आवारा बना देता है। भटकने लगती हूँ मैं.... लगता है कि, लेनिन के आँखें मुझसे मिले, और उसकी देह में मेरी मौत हो जाए।

       ये उत्तरायण एक अफवाह है, अभी तक तो रातें यूँ ही लंबी लंबी दिख रही हैं। कल एक दोस्त ने कहा कि सात रंगों को घुमाया जाए तो सिर्फ सफेद दीखता है, लेनिन का प्रेम सफेद नहीं हो सकता उसके बिना जिंदगी बिना रंग की जरूर है। मैं कैसा जीवन जी रही हूँ? मुझे नहीं मालूम, अचानक फ़ोन बजा, ये मिली थी। जो बेरंग ज़िन्दगी से मुक्त हो चुकी थी, महिला सशक्तिकरण के राष्ट्रगान में उसने भी खूब अपनी बेज्जती की धुन सुनी। उसके पति ने उसके जीवन में शायद ही कभी कोई अच्छा सा प्रेमगीत गाया हो। ये साइकिल वाला शख्स क्यों चला रहा है ये साइकिल जब महिला हर जगह समझौते कर रही है। वह समझौते कर रही है क्योंकि वह आत्मनिर्भर नहीं... समाज उसके लिए गाली तैयार रखता है अगर वह शादी के बाद , अपनी नीरस जिंदगी में आये कुछ अच्छे प्रेमगीत गुनगुनाये! 'चरित्रहीन मिली'

       मैं भी चरित्रहीन हूँ क्योंकि मैंने भी प्रेमगीत गुनगुनाने की कोशिश की है। लेकिन मिली को लेनिन नहीं पसंद,क्योंकि  मुझसे उम्र में बड़ा और काफी परिपक्व है। मैं मिली को बताती भी नहीं की लेनिन अब मेरा ख्याल नहीं हकीकत बन चुका है पर चुप रह जाती हूँ। क्योंकि मिली जानती है कोई और भी है जो अनु को टूट टूट के प्यार करता है, "गौरांग" पर वह भी एक झूठ है बहुत बड़ा झूठ! अब सच है तो सिर्फ लेनिन। अचानक मेरे ख्याल को सुनकर पार्वती के मुंह में मुस्कान आई जो शायद अब शिव को अच्छी नहीं लगी क्योंकि चरित्रहीन महिला किसी भी पुरुष को नहीं पसंद। पुरुष दबंग महिलाओं से  डरता है और चुहिया टाइप औरतों को चूहेदानी में बंद कर देता है जबकि उसका नाम चूहेदानी है। खैर शिव जी आपको उत्तरायण की बहुत बहुत शुभकामनाएं और चूंकि मैं असुर गण की हूँ तो मैं दक्षिणायन में ही खुश हूँ। कल लेनिन को पूछना पड़ेगा की वह मेरे सात इस राशि में खुश है या नहीं?  आज शिव का मुँह टेढ़ा है और पार्वती और गणेश मुस्करा रहे हैं।

शेष......
सोनिया

1 comment:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, "ब्लॉग बुलेटिन - ये है दिल्ली मेरी जान “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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