Wednesday, 4 July 2012

याद सूखे ज़ख़म सी है

तेरी यादें समुन्दर सी
मेरे जीवन में आती हैं,
उसकी लहरें मेरा जीवन,
इन्तशार कर जाती हैं..
करूँ पुरजोर कोशिश मैं...
...भुला दूँगी सनम तुझको
मगर सूखे जखम सी हैं
हरी ये हो ही जाती है...
तेरी यादें समुन्दर सी
मेरे जीवन में आती हैं,

अगर अब मौत भी आये,
तेरे आगोश में आये...
मगर मुझको खबर है..
आरजू ये बेमानी है
ये जीवन तो मेरे दिलबर
मुझे हर पल सताएगा
हकीकत तो यही है की
मौत इक पल में आनी है
तेरी यादें समुन्दर सी
मेरे जीवन में आती हैं,
(सोनिया बहुखंडी गौड़ )

8 comments:

  1. वाह: सोनिया बहुत सुन्दर...

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  2. तेरी यादें समुन्दर सी
    मेरे जीवन में आती हैं.

    बहुत सुंदर भावपूर्ण प्रतिवेदन.

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  3. बहुत सुन्दर...

    अनु

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  4. एहसास बहुत खूबसूरती से लिखे हैं

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  5. एहसास के स्वर

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  6. bhula dungi sanam tujhko...'
    magar sookhe jakhm si hain
    hari ye ho hi jati hain.

    dil ko gahrayi se chhoo jane wala dard hai....jis par beetTa he vahi likh sakta hai.

    bahut sunder.

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  7. एहसासों को अपने शब्द देकर जिवंत कर दिया आपने.....

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